कोटिंग घनत्व

कोटिंग/कोटिंग प्रकार या कोटिंग घनत्व शब्द लेपित अपघर्षकों के क्षेत्र में उस घनत्व का वर्णन करता है जिसके साथ अपघर्षक दाने को  तल  पर लगाया जाता है.  कोटिंग के 3 प्रकार हैं:

घनी कोटिंग: तल लगभग पूरी तरह से अपघर्षक दानों से लेपित होता है. इस प्रकार के कोटिंग के दौरान दानों के छोरों का बड़ी मात्रा में इस्तेमाल होने के कारण स्टॉक हटाने की उच्च दर और अपघर्षक को एक लम्बा सेवा जीवन मिलता है.   घनी कोटिंग को आमतौर पर धातु प्रसंस्करण के लिए उपयोग किए जाने वाले अपघर्षकों पर प्रयोग किया जाता है.

अर्ध-खुली कोटिंग: तल लगभग 70- 80% तक अपघर्षक दानों से लेपित होता है. दानों के व्यक्तिगत छोरों के बीच के रिक्त स्थान से पिसाई से उत्पन्न हुई धूल या चिप्पड़ का जमाव और निर्वहन संभव होता है. एक अर्ध-खुली कोटिंग का इस्तेमाल आम तौर पर नरम सामग्री के लिए किया जाता है, उदाहरण के लिए, वार्निश, प्लास्टिक और अलौह धातुओं के अपघर्षण के लिए.

खुली कोटिंग: तल लगभग 50 - 70% तक अपघर्षक दानों से लेपित होता है. इस कोटिंग में अपघर्षक दानों के बीच का अधिक चिप स्पेस क्लॉगिंग को कम करके अपघर्षक क्षेत्र से अपघर्षक चिप्पड़ों के निर्वहन को संभव करता है. एक खुली कोटिंग का उपयोग आम तौर पर लकड़ी और अन्य लम्बे चिप्पड़ों वाली सामग्री पर इस्तेमाल किए जाने वाले अपघर्षकों

कोटिंग घनत्व को, इसके अतिरिक्त, एक अपघर्षक की आक्रामकता और परिष्कृत की गयी सतह की उत्कृष्टता को प्रभावित करने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

दबाव = बल/क्षेत्र (p = F/A)

एक घनी कोटिंग की तुलना में एक खुली कोटिंग में लगाया गया बल दानों के छोरों की अपेक्षाकृत कम संख्या पर सर्वत्र फ़ैलता है.   इसके कारण दाने ज़्यादा गहराई से भेदन करते हैं और ज़्यादा स्टॉक हटता है. दूसरी ओर, स्पष्टतः घनी कोटिंग में जहां बहुत सारे दानों के छोरों का इस्तेमाल होता है, व्यक्तिगत दाने के छोर पर लगाया गया बल निश्चित रूप से काफी कम होता है; दाना इतना गहरा नहीं घुस पाता है और परिणामस्वरूप परिष्कृत सतह अधिक उम्दा होती है.

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